पवन जब गुनगुनाती है, तुम्हारी याद आती है
घटा घनघोर छाती है, तुम्हारी याद आती है
बर्क़ जब कड़कडाती हैं, तुम्हारी याद आती है
कि जब बरसात आती है, तुम्हारी याद आती है
तुम्हारी याद आती है, तो लाखों दीप जलते हैं
मेरी चाहत के मधुबन में हज़ारों फूल खिलते हैं
इन आंखों में कई सपने, कई अरमां मचलते हैं
तुम्हारी याद आती है तो तन के तार हिलते हैं

पढ़ने से सस्ता कोई और मनोरंजन नहीं
न ही कोई ख़ुशी इतनी चिरस्थायी है
- लेडी मौन्टेगू
अपनी त्रुटि का पता चलने के बाद उसे मिटाने में
थोड़ा भी समय नहीं खोना चाहिए ।
इसी में हम कुछ करते हैं ; यही नहीं बल्कि सच्चा काम करते हैं ।
इसके विपरीत आचरण करके
अपने धर्म को भूल जाना सचमुच बुरे से बुरा काम है
- महात्मा गांधी
प्यार
को
प्यार रहने दो
व्यापार न बनाओ
व्यापार बनाते हो
तो
प्यार मत जताओ
क्योंकि प्यार लुटने का सोपान है
और व्यापार लूटने का सामान है
व्यवहार
दोनों का भिन्न है
इसीलिए
दुनिया खिन्न है
क्योंके
उत्साह में आ कर अत्यन्त
अतिरेक कर देती है
और दो विपरीत धाराओं को
एकमेक कर देती है
प्यार पपीहे का पावन तप है
जबकि व्यापार बगुला जप है
आधा घंटा से ज़्यादा उपदेश देने के लिए
आदमी
या तो ख़ुद फ़रिश्ता हो या सुनने के लिए फ़रिश्ते रखे -व्हाईट फ़ील्ड
प्यारे ब्लोगर साथियो !
हम सब सरस्वती और शब्द-ब्रह्म के साधक उपासक हैं, संयोग से
अभी शारदीय नवरात्र भी चल रहे हैं, ऐसे में यदि कोई स्पर्धा हो
जगत जननी माँ जगदम्बा के वन्दन की, तो क्या हमें बढ़ चढ़ कर
भाग नहीं लेना चाहिए ? लेना चाहिए न ? तो लीजिये............मैंने
कब मना किया ?
मैं तो केवल ये बता रहा हूँ कि इस स्पर्धा का परिणाम घोषित होने में
केवल 13 घंटे शेष बचे हैं इसलिए कृपया जल्द से जल्द अपनी रचना
भेजिए...और वाह वाही के साथ साथ 900 रुपये का नगद पुरस्कार
भी प्राप्त कीजिये।
स्पर्धा के बारे में यदि आपको जानकारी न हो तो ये लिंक देख लीजिये : http://albelakhari.blogspot.com/2010/10/500-900.html-अलबेला खत्री