मंगलवार, 3 मई 2011

तुम्हारी याद आती है, तो लाखों दीप जलते हैं





पवन जब गुनगुनाती है, तुम्हारी याद आती है

घटा घनघोर छाती है, तुम्हारी याद आती है

बर्क़ जब कड़कडाती हैं, तुम्हारी याद आती है

कि जब बरसात आती है, तुम्हारी याद आती है



तुम्हारी याद आती है, तो लाखों दीप जलते हैं

मेरी चाहत के मधुबन में हज़ारों फूल खिलते हैं

इन आंखों में कई सपने, कई अरमां मचलते हैं

तुम्हारी याद आती है तो तन के तार हिलते हैं


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मंगलवार, 2 नवम्बर 2010

पढ़ने से सस्ता कोई और मनोरंजन नहीं



पढ़ने से सस्ता कोई और मनोरंजन नहीं


ही कोई ख़ुशी इतनी चिरस्थायी है



- लेडी मौन्टेगू

रविवार, 31 अक्तूबर 2010

अपने धर्म को भूल जाना सचमुच बुरे से बुरा काम है




अपनी त्रुटि का पता चलने के बाद उसे मिटाने में

थोड़ा भी समय नहीं खोना चाहिए

इसी में हम कुछ करते हैं ; यही नहीं बल्कि सच्चा काम करते हैं

इसके विपरीत आचरण करके

अपने धर्म को भूल जाना सचमुच बुरे से बुरा काम है


- महात्मा गांधी



बुधवार, 27 अक्तूबर 2010

फ़र्क देखो प्यार और व्यापार में............




प्यार


को

प्यार रहने दो

व्यापार बनाओ



व्यापार बनाते हो

तो

प्यार मत जताओ


क्योंकि प्यार लुटने का सोपान है

और व्यापार लूटने का सामान है


व्यवहार

दोनों का भिन्न है

इसीलिए

दुनिया खिन्न है


क्योंके

उत्साह में कर अत्यन्त

अतिरेक कर देती है

और दो विपरीत धाराओं को

एकमेक कर देती है


प्यार पपीहे का पावन तप है

जबकि व्यापार बगुला जप है


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मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

या तो ख़ुद फ़रिश्ता हो या सुनने के लिए फ़रिश्ते रखे




आधा घंटा से ज़्यादा उपदेश देने के लिए

आदमी

या तो ख़ुद फ़रिश्ता हो या सुनने के लिए फ़रिश्ते रखे



-व्हाईट फ़ील्ड


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शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

रिश्ते में तो हम हिन्दी के बेटे हैं और नाम है माणिक मृगेश


आइये मित्रो !


आज मैं आपको मिलवाता हूँ एक ऐसे महान हिन्दी सेवक से

जिनकी पूरी की पूरी जीवनचर्या अपने दैनंदिन रिदम के साथ

लगातार हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में

जुटी है


अनेकानेक सम्मान और पुरस्कार प्राप्त यह हस्ती पिछले दिनों

एक और बड़े सम्मान से सम्मानित हुई आइये अपनी बधाइयों

और मंगल कामनाओं के साथ मिलें इण्डियन आयल में सतत

सेवारत, बड़ौदा निवासी एक ज़बरदस्त कलमकार डॉ माणिक

मृगेश जी से.........................



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रविवार, 10 अक्तूबर 2010

केवल 13 घंटे शेष बचे हैं, कृपया जल्द से जल्द अपनी रचना भेजिए व 900 रुपये पुरस्कार प्राप्त कीजिये




प्यारे ब्लोगर साथियो !

हम सब सरस्वती और शब्द-ब्रह्म के साधक उपासक हैं, संयोग से

अभी शारदीय नवरात्र भी चल रहे हैं, ऐसे में यदि कोई स्पर्धा हो

जगत जननी माँ जगदम्बा के वन्दन की, तो क्या हमें बढ़ चढ़ कर

भाग नहीं लेना चाहिए ? लेना चाहिए ? तो लीजिये............मैंने

कब
मना किया ?


मैं तो केवल ये बता रहा हूँ कि इस स्पर्धा का परिणाम घोषित होने में

केवल 13 घंटे शेष बचे हैं इसलिए कृपया जल्द से जल्द अपनी रचना

भेजिए...और वाह वाही के साथ साथ 900 रुपये का नगद पुरस्कार

भी प्राप्त कीजिये


स्पर्धा के बारे में यदि आपको जानकारी हो तो ये लिंक देख लीजिये :


http://albelakhari.blogspot.com/2010/10/500-900.html



-अलबेला खत्री

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