शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

ग़म मनाने के लिए फुर्सत नहीं है




गीत गाने के लिए फुर्सत नहीं है


मुस्कुराने के लिए फुर्सत नहीं है



धन कमाने में फँसा हूँ इस कदर


धन उड़ाने के लिए फुर्सत नहीं है



पीने को कुछ हो तो ले आओ मगर


मुझको खाने के लिए फुर्सत नहीं है



मत दिखाओ कार्ड मुझको शादियों के


आने-जाने के लिए फुर्सत नहीं है



मित्र के देहान्त पर दुःख है मगर


ग़म मनाने के लिए फुर्सत नहीं है



सत्य कहना विवशता है 'अलबेला'


अब बहाने के लिए फुर्सत नहीं है




गुरुवार, 10 दिसंबर 2009

जो कराना है करालो.............




तुम कहो तो मैं सितारे तोड़ लाऊं


तोड़ कर घर तक तुम्हारे छोड़ आऊं



तुम कहो तो मैं समन्दर को सुखा दूँ


उसका सारा खारापन खा कर पचा दूँ



तुम कहो तो बेर का हलवा बना दूँ


सारा हलवा तेरी कुतिया को खिलादूं



तुम कहो तो हिमशिखर पर घर बनालूँ


और सूरज पर नया दफ़्तर बनालूँ



तुम कहो तो चाँद पर झूला लगा दूँ


बादलों की गोद में बिस्तर बिछा दूँ



तुम कहो तो दिल्ली को नीलाम कर दूँ


आगरे का ताज तेरे नाम कर दूँ



इससे पहले कि प्रिये ! मैं जाग जाऊं


खटिया से उठ कर कहीं पर भाग जाऊं



जो कराना है करालो.............


जो कराना है करालो.............


जो कराना है करालो.............

बुधवार, 9 दिसंबर 2009

फिर तुम्हारा जी करे तो लौट जाना




रात ये

मधुरात सी


मधुरात सी

बारात सी


बारात सी

बरसात सी


बरसात सी

जज़्बात सी


जज़्बात सी

उत्पात सी


उत्पात सी

आघात सी


आघात सी

हालात सी


_____हालात तुम बिन क्या हुए हैं देख लो...........

_____क्या थे, क्या हम हो गए हैं देख लो...........


देख लो इक बार आकर आशियाना

फिर तुम्हारा जी करे तो लौट जाना


लौट जाना इस तरह कि टूट जाए हर सगाई

तू अगर राज़ी है इसमे, मेरी भी इसमे रज़ाई



मुझे भरोसा है तुझ पर...........




एकान्त के क्षण

मिलते नहीं

इसलिए

भीतर के फूल

खिलते नहीं

परन्तु मुझे भरोसा है तुझ पर

कि तू दुई मिटा देगा..........

परदे सब हटा देगा ..........

एकाकार हो जायेंगे जब हम

तो जोत जल जायेगी

साधना फल जायेगी

जब हम घुल जायेंगे

आपस में मिल जायेंगे

तो फूल

ख़ुद-ब-ख़ुद ही खिल जायेंगे


-अलबेला खत्री


रविवार, 15 नवंबर 2009

टूटना और बिखरना है बाकी अभी



अक़्स
-ए-सावन उभरना है बाकी अभी

रुत का सजना, संवरना है बाकी अभी



उनकी क़ातिल अदाओं का दिल में मेरे

दशना बन के उतरना है बाकी अभी



उनकी गलियों से तो कल गुज़र आए हैं

अपनी हद से गुज़रना है बाकी अभी



उनके आने के झूठे भरम का ऐ दिल !

टूटना और बिखरना है बाकी अभी



जल्दबाजी न कर 'अलबेला' इस कदर

उनका इज़हार करना है बाकी अभी


शनिवार, 14 नवंबर 2009

आइये, हम हास्य और आनन्द की बातें करें



फूल की बातें करें, मकरन्द की बातें करें

गीत की बातें करें और छन्द की बातें करें

द्वेष ने बारूद पर बैठा दिया है आदमी

आइये, हम हास्य और आनन्द की बातें करें


शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

क्या ख़बर फिर ऐसा मौसम हो न हो........



आओ


कुछ बात करें......


खामोश रह कर

बाहोश रह कर............



आओ

जाग जाएं कुछ लम्हात के लिए

उठ जाएं सफ़र की रात के लिए



आओ

टटोल लें

गांठें अपनी खोल लें तन्हाई में

डूब जायें चार पल शहनाई में


क्या ख़बर फिर ऐसा मौसम हो न हो........

क्या ख़बर फिर संग तुम-हम हों न हों


आओ

कुछ बात करें......


खामोश रह कर

बाहोश रह कर............