कल की पोस्ट में मैंने सबसे आग्रह किया था कि कृपा कर के
कविता की परिभाषा अपने शब्दों में लिखें और बताएं लेकिन
उतना प्रतिसाद नहीं मिला जितना मुझे अपेक्षित था ।
जो भी हो, मैं एक बार फिर प्रयास करता हूँ । आज कुछ और
परिभाषाएं कविता की पोस्ट कर रहा हूँ । यदि आपका
समर्थन इस काम को मिला तो ठीक वर्ना मैं इसकी अगली
कड़ी रोक दूंगा...........जो माल बिके ही नहीं, उसे बना कर भी
क्यों रखूं...हा हा हा हा हा हा
कविता क्या है ?कल से आगे...................कड़ी क्रमांक 2कविता भावनाओं से रंगी हुई बुद्धि है- प्रोफ़ेसर विल्सनकविता ईश्वर की इस प्रकार सेवा करने में है कि
शैतान नाराज़ न हो.......- फुलर
जो कविता वासना से पैदा होती है, हमेशा नीचा गिराती है;
वास्तविक हार्दिकता से पैदा हुई कविता हमेशा शरीफ़ और
ऊँचा बनाती है- ऐ ऐ हॉपकिन्सकविता की एक ख़ूबी से किसी को इनकार नहीं होगा कि वह
गद्य की अपेक्षा थोड़े शब्दों में अधिक बहती है- वोल्टेरकविता विचार का संगीत है जो हम तक वाणी के संगीत में आता है- चैट फील्डकविता शैतान की नहीं, ईश्वर की शराब है- एमर्सन
कविता के जजों व समझने वालों की अपेक्षा हमें कवि ज़्यादा
मिलते हैं । एक अच्छा सा पद्य समझने की अपेक्षा एक रद्दी
सा पद्य लिख लेना आसान है- माउन्टेन कविता स्वयं ईश्वर की चीज़ है उसने अपने पैगम्बरों को कवि
बनाया और जब हम कविता की अनुभूति करते हैं, प्रेम और
शक्ति में ईश्वर के समान हो जाते हैं- बेलीजिससे आनन्द प्राप्त न हो, वह कविता नहीं है.........- जोबर्ट
कविता अपने दैवी स्रोत के सबसे ज़्यादा अनुरूप तब होती है
जबकि वह धर्म की शान्तिमयी धारा बहाती है- वर्डस्वर्थ
प्यारे पाठकों से
विनती है कि आप भी अपने विचार भेजें
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हज़ारों हज़ार कवि हो चुके, लाखों लाख कवितायें लिखी
जा चुकीं........लेकिन आज भी यह प्रश्न जब उठता है कि
कविता क्या है ? तो अच्छे अच्छे कवि और लेखक
गोलमोल बातें करके शब्दजाल द्वारा कुछ ऐसा जवाब देते हैं
जिसका कोई मतलब नहीं होता ..........क्षमा कीजियेगा, मैं भी
उनमे से एक हूँ जो दो घंटे तक कविता सुना सकता हूँ लेकिन
कविता पर दो मिनट भी सटीक और सार्थक
नहीं बोल सकता .......
इसलिए आज से मैं इस ब्लॉग पर कविता के बारे में एक
जानकारीपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण धारावाहिक चर्चा आरम्भ कर
रहा हूँ जिसमे आप पढेंगे कि दुनिया भर के विद्वानों ने
कविता के बारे में क्या कहा है ........
निवेदन ये है सभी से कि जब आप अपनी टिप्पणी करें तो
यह ज़रूर लिखें कि कविता के बारे में आप क्या सोचते हैं
इस प्रकार यह एक संकलन हो जायेगा जिसे पुस्तक के
रूप में प्रकाशित करके कविता की परिभाषायें उपलब्ध
करायेंगे।
ख़ास बात ये होगी कि इसमें पुराने विद्वान भी शामिल होंगे
और आज के कवि - ब्लोगर भी............
तो प्रस्तुत है पहली कड़ी...............इस पर आपकी टिप्पणी
ज़रूर मिलनी चाहिए ताकि मुझे लगे कि ऐसे विषय पर
काम करो, तो भी लोग पढ़ते और टिपियाते हैं
---क्या है कविता ?
कविता छाया खड़ी करने की कला है ......... वह
किसी चीज़ को हस्ती प्रदान नहीं करती ।- बर्क
कविता आत्मा का संगीत है और सबसे ज़्यादा
महान व अनुभूतिशील आत्माओं का ।
वोल्टेर
कविता की कला भावनाओं को छूना है और उसका
कर्त्तव्य उन्हें सदगुण की ओर ले जाना है ।- कूपर
सत्य से सत्य को सुन्दर से सुन्दर रूप देना कविता है ।- श्रीमती ब्राउनिंगउत्कृष्ट कवि की लाजवाब कविता भी बिना
राम नाम के शोभा नहीं देती जैसे कि सब तरह से
सजी हुई सर्वान्गसुन्दरी चंद्रमुखी स्त्री बिना वस्त्र के
शोभा नहीं पाती और अगर किसी कुकवि की सब गुण
रहित वाणी राम नाम के यश से अंकित हो तो
बुधजन उसे सुनते सुनाते हैं और सन्त लोग मधुकर
की तरह उसके गुण को ग्रहण करते हैं ।- गोस्वामी तुलसीदास
कविता किससे बनी है ? एक भरे हुए हृदय से,
जो कि सद्भावना से लबालब भरा हो।- गेटेकविता का जामा पहन कर सत्य और भी चमक उठता है ।- पोपआपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में............
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बहुत दिनों से मैंने मेरा कोई वीडियो नहीं लगाया । ऐसी शिकायतें
अनेक मित्रजन करते हैं तो लीजिये आज एक वीडियो लगा रहा हूँ
इसमें दिखूंगा तो मैं नहीं लेकिन दिखने वाली गायिका जो गीत गा
रही है वह लिखा हुआ मेरा ही है ।
टी वी चैनल पर सारेगाना प्रतियगिता के दूसरे वोल्यूम में सुश्री
पूजा गोपालन जिस गीत को गा कर विजयी हो गई वह मेरा
लिखा गीत था । आप चाहें तो सुश्री पूजा के साथ साथ मुझे भी
बधाई दे सकते हैं लेकिन बधाइयाँ बांटते समय छत्तीस गढ़ के
लाड़ले बेटे अर्णब चटर्जी को न भूल जाना जिन्होंने गीत की
प्यारी सी धुन बनाई और संगीत दिया......
एक कैबरे गीत के रूप में लिखा गया गाना कितना शालीन
बन पड़ा है...देखिये और एन्जॉय कीजिये www.albelakhatri.com
मुबारक हो.....
मुबारक हो कसाब, तू जीत गया
भाग्य हमारा खराब, तू जीत गया
तू जीत गया हरामज़ादे !
भारत हार कर बैठा है
क्योंकि लोकतंत्र हमारा
कुंडली मार कर बैठा है
खोद ! खोद ! ख़ूब कब्र तू हमारी खोद !
तेरे तो दोनों हाथों में लड्डू हैं चादरमोद !
जब तलक ज़िन्दा रहेगा, जेल में आराम फ़रमायेगा
वीआईपी हत्यारा है न,
मन चाहा पिएगा - मन चाहा खायेगा
और कहीं सचमुच फांसी हो गई तो शहीद कहलायेगा
हाँ हाँ शहीद कहलायेगा तू अपने मुल्क नापाक का
एक एक बाल पुज जायेगा हरामखोर तेरी नाक का
हम तो भारतीय हैं
जंग में चाहे कितने बहाद्दुर हों, घर में तो पांगु हैं
क्योंकि स्वभाव से ही दयालु अर्थात डान्गु हैं
इसीलिए तुझ जैसे आंडू-पांडू भी हमें छील डालते हैं
और हमारे हरे-भरे घरों को दिनदहाड़े लील डालते हैं
काश !
काश !
सूअर की औलाद ...काश ! तू मेरे हाथ लग जाये......
वो करूँ तेरे साथ मैं....
कि तेरे मुर्दा पुरखे भी तड़प कर कब्रों में जग जाये .....
मैं तुझे फांसी नहीं दूँ
गोलियां भी नहीं मारूं
क्योंकि मौत तेरे लिए सज़ा नहीं मज़ा है
मौत मिल जाये ये तो ख़ुद तेरी भी रज़ा है
मैं तो तुझे ज़िन्दा रखूं ............
ज़िन्दगी भर गधा बना कर रखूं
और तेरी सवारी करूँ
चिलचिलाती धूप में, दहकती हुई सड़क पर,
नंगे पाँव, नंगे बदन, जब मेरा बोझ ढोयेगा
तो गधे के बीज ! तू ख़ून के आँसू रोयेगा
मैं तो रात - दिन तुझे कोल्हू पर लगा कर दौड़ाऊँ
सरसों के साथ साथ तेरा भी थोड़ा तेल निकलवाऊं
बहुत कुछ करना चाहता हूँ मैं तेरे साथ कमीने !
तुझ शैतान की संतान ने हमारे सुख-चैन छीने
लेकिन अफ़सोस रे.................................
अफ़सोस !
तू तक़दीर का बादशाह है, मुकद्दर का धनी है
सज़ा और वो भी कड़ी ? तेरे लिए कहाँ बनी है ?
उज्ज्वल निकम खुश हैं
क्योंकि पूरा भारत ख़ुशफ़हमी में पटाखे छोड़ रहा है
वो तो अलबेला खत्री पगला है जो माथा फोड़ रहा है
उड़ा उड़ा.........
ख़ूब मज़े उड़ा............
पहले वारदात करके सैकड़ों को मारा
और अरबों रुपयों का नुक्सान किया
अब तेरे रखरखाव
और सुनवाई पर करोड़ों खर्च हो रहा है
यानी सब कुछ तेरे ही हक़ में हो रहा है
पाकिस्तान खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा है
क्योंकि उसका
एक मामूली लौंडा भी गज़ब ढा रहा है
पूरी पलटन का काम तू अकेला कर रहा है
और नुक्सान .....हिन्दुस्तान का अवाम भर रहा है
लगा रह चादरमोद ! लगा रह ...........
तुझे हक़ है..हक़ है पाकिस्तान में पैदा होने का
काश !
हमें भी मौका मिल जाये वतन पे शैदा होने का
छोड़ो अलबेला ...........
जाने दो....
कौन सुनता है ?
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बेटियां आँगन की महक होती हैं
बेटियां चौंतरे की चहक होती हैं
बेटियां सलीका होती हैं
बेटियां शऊर होती हैं
बेटियों की नज़र उतारनी चाहिए
क्योंकि बेटियां नज़र का नूर होती हैं
इसीलिए
बेटी जब दूर होती हैं बाप से
तो मन भर जाता संताप से
डोली जब उठती है बेटी की
तो पत्थरदिलों के दिल भी टूट जाते हैं
जो कभी नहीं रोता
उसके भी आँसू छूट जाते हैं
बेटियां ख़ुशबू से भरपूर होती हैं
उड़ जाती हैं तब भी सुगन्ध नहीं जाती
क्योंकि बेटियां कपूर होती हैं
बेटी घर की लाज है
बेटी से घर है समाज है
बेटी दो दो आँगन बुहारती है
बेटियां दो दो घर संवारती हैं
बेटी माँ बाप की साँसों का सतत स्पन्दन है
बेटी सेवा की रोली और मर्यादा का चन्दन है
बेटी माँ का दिल है, बाप के दिल की धड़कन है
बेटी लाडली होती है सब की
बेटियां सौगात होती है रब की
बेटे ब्याह होने तक बेटे रहते हैं
लेकिन बेटी आजीवन बेटी रहती हैं
बेटियों की गरिमा पहचानता हूँ
बेटियों का समर्पण मैं जानता हूँ
इसलिए बेटी को मैं पराया नहीं
अपितु अपना मूलधन मानता हूँ

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कंजूस आदमी का गड़ा हुआ धन
ज़मीं से
तभी बाहर निकलता है
जब वह
स्वयं ज़मीं में गड़ जाता है
- शेख सादी