सोमवार, 9 नवंबर 2009

तुम्हारी याद आती है, तो लाखों दीप जलते हैं............



पवन
जब गुनगुनाती है, तुम्हारी याद आती है


घटा घनघोर छाती है, तुम्हारी याद आती है

बर्क़ जब कड़कडाती हैं, तुम्हारी याद आती है

कि जब बरसात आती है, तुम्हारी याद आती है




तुम्हारी याद आती है, तो लाखों दीप जलते हैं

मेरी चाहत के मधुबन में हज़ारों फूल खिलते हैं

इन आँखों में कई सपने, कई अरमां मचलते हैं

तुम्हारी याद आती है तो तन के तार हिलते हैं


3 टिप्‍पणियां:

  1. लगता है आपको वाकई किसीकी बहुत याद आ रही है! दिल की गहराई से लिखी हुई इस लाजवाब और उम्दा रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!

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  2. Sundar maja ayaa.
    Yad to such men aisi hii hoti hai.
    Aisa hii hota hai.
    Is post ke liye bahut bahut badhaiyan.

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