बुधवार, 9 दिसंबर 2009

मुझे भरोसा है तुझ पर...........




एकान्त के क्षण

मिलते नहीं

इसलिए

भीतर के फूल

खिलते नहीं

परन्तु मुझे भरोसा है तुझ पर

कि तू दुई मिटा देगा..........

परदे सब हटा देगा ..........

एकाकार हो जायेंगे जब हम

तो जोत जल जायेगी

साधना फल जायेगी

जब हम घुल जायेंगे

आपस में मिल जायेंगे

तो फूल

ख़ुद--ख़ुद ही खिल जायेंगे


-अलबेला खत्री


5 टिप्‍पणियां:

  1. पाठ जिसने अमन का जग को पढ़ाया,
    धर्म की निरपेक्षता का पथ दिखाया,
    क्यों नजर आता नही वो व्याकरण।
    देश का दूषित हुआ वातावरण।।

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  2. बहुत सुन्दर रचना, अलबेला भाई...

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  3. फूल जरूर खिलेंगे अलबेला भाई। आस जगाने वाली रचना।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  4. उम्मीद पे दुनिया कायम रखिए...फूल ज़रूर खिलेंगे...बढिया रचना

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